चंद्रयान 2: लैंडर के मिलने पर अब खुलेंगे कई राज, वैज्ञानिकों के लिए मुश्किल हो रहा संपर्क साधना

0

नई दिल्ली :पुलिसनामा ऑनलाइन – भारत का महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2‘ के लैंडर ‘विक्रम’ का चांद पर उतरते समय जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया। सपंर्क तब टूटा जब लैंडर चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था। चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर ‘विक्रम’ के उतरने की सारी प्रक्रिया सामान्य थी। मगर आखिरी के डेढ़ मिनट ने सबको निराश कर दिया। सभी वैज्ञानिकों के चेहरे पर मायूसी छा गयी। लेकिन अब इससे जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है।

कल इसरो ने बताया कि ऑर्बिटर ने लैंडर विक्रम की लोकेशन का पता लगा लिया था, जिसके बाद से लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की उम्मीद एक बार फिर जगी है। हालांकि लैंडर विक्रम से संपर्क साधना वैज्ञानिकों के लिए आसान नहीं हो रहा है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है लैंडर विक्रम से वैज्ञानिकों की पकड़ ढीली होती जा रही है। इसरो प्रमुख के. सिवन ने शनिवार को कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी 14 दिनों तक लैंडर से संपर्क स्थापित करने की कोशिश करेगी। दरअसल रोवर ‘प्रज्ञान’ का जीवनकाल एक चंद्र दिवस यानी कि धरती के 14 दिन के बराबर है। अभी भी लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की कोशिश हो रही है।

लैंडर विक्रम के मिलने पर कई राज भी खुलेंगे। बेंगलुरू के इसरो सेंटर में मौजूद वैज्ञानिक दिन रात एक किए हैं कि किसी तरह लैंडर से संपर्क भी हो जाए। लैंडर की जानकारी सामने आते ही वैज्ञानिकों की पहली कोशिश ये पता लगाने की होगी कि विक्रम चांद की सतह पर लैंड कर पाया है की नहीं। वहीं विक्रम ने क्रैश किया या फिर सतह पर उतरने से पहले दिशा भटक गया। शायद सोलर एनर्जी से विक्रम दोबारा काम कर सकता है। 24 घंटे पहले छाई निराशा के बीच आज आशा की कुछ रोशनी दिखने लगी है। संपर्क टूटने के 36 घंटे बाद लैंडर विक्रम की लोकेशन मिली है।

इसके अलावा चांद के चारों तरफ चक्कर लगा रहे ऑर्बिटर में लगे ऑप्टिकल हाई रिजोल्यूशन कैमरा (OHRC) से विक्रम लैंडर की तस्वीर ली जाएगी। यह कैमरा चांद की सतह पर 0.3 मीटर यानी 1.08 फीट तक की ऊंचाई वाली किसी भी चीज की स्पष्ट तस्वीर ले सकता है।

You might also like