कोरोना के बीच खतरे में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की कुर्सी, CM पद बचाने के लिए दो ही उपाय

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मुंबई : पोलिसनामा ऑनलाइन – देश में इन दिनों कोरोना वायरस का कहर है। हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग लॉकडाउन की वजह से घरों में रहने को मजबूर है। इस बीच महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा कोरोना मरीज पाए गए है। मौत भी सबसे ज्यादा यहीं हुई है। इस कोरोना के संकट के बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की कुर्सी खतरे में नजर आ रही है। दरअसल उद्धव महाराष्ट्र के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं यानी न तो विधानसभा (एमएलए) और न ही विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य हैं। अब कोरोना के खतरों की वजह से महाराष्ट्र में एमलसी का होना वाला चुनाव टाल दिया गया है, जिसके चलते उद्धव के सामने सीएम पद को बचाए रखने की मुश्किल खड़ी हो गई है।

 राज्य के किसी सदन का सदस्य होना अनिवार्य –
दरअसल उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर, 2019 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। संविधान की धारा 164 (4) के अनुसार उद्धव ठाकरे को 6 माह में राज्य के किसी सदन का सदस्य होना अनिवार्य है।  ऐसे में उद्धव ठाकरे को अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी को बचाए रखने के लिए 28 मई से पहले विधानमंडल का सदस्य बनना जरूरी है। अगर वो ऐसा नहीं करते तो उनकी कुर्सी जा सकती है। कोरोना संकट के कारण यह विकल्प बिल्कुल संभव नहीं लगता। क्योंकि देश व्यापी लॉक डाउन के कारण 14 अप्रैल से पहले अधिसूचना जारी हो पाना संभव नहीं है।

CM पद बचाने के लिए दो ही उपाय –
पहला विकल्प – राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के ऊपर निर्भर करेगा। महाराष्ट्र में राज्यपाल द्वारा मनोनीत होने वाली विधान परिषद की दो सीटें फिलहाल रिक्त हैं। इनमें से एक सीट पर राज्य सरकार उद्धव ठाकरे के नाम को नामित करने के लिए राज्यपाल के पास सिफारिश कर सकती है। सरकार द्वारा भेजे गए नाम पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी सहमत हो जाते हैं तो उद्धव ठाकरे अपनी सीएम की कुर्सी बचाए रखने में सफल हो सकते हैं।

दूसरा उपाय – वह अपने पिछले शपथ ग्रहण से छह माह की अवधि पूर्ण होने से पहले ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दें। इसके बाद उन्हें दोबारा से सीएम पद की शपथ लेनी होगी, जिससे उन्हें विधानमंडल की सदस्यता ग्रहण करने के लिए 6 महीने का और समय मिल जाएगा। हालांकि, इसमें एक पेच ये है कि सीएम इस्तीफा देते हैं तो उससे पूरे मंत्रिमंडल का इस्तीफा माना जाता है ऐसे में सीएम पद की दोबारा शपथ के बाद मंत्रिमंडल को भी शपथ दिलानी होगी। महाराष्ट्र में कोरोना वायरस का संकट जिस तरह से छाया हुआ है।  ऐसे में फिर से पूरे मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण कराना राज्य के लिए मुश्किल होगा।

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