अर्थव्यवस्था फिर डगमगाई! खाद्य पदार्थों की महंगाई बढ़कर 5.54% हुई,  3 साल का रिकॉर्ड टूटा

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नई दिल्ली: पोलीसेनमा ऑनलाइन –लंबे समय से देश की आर्थिक व्यवस्था को लेकर कोई बड़ी अच्छी खबर सुनने में नहीं आ रही है. आसमान छूती मंहगाई, उद्योगों को घाटा, बंद होती कंपनियां, गिरती GDP ग्रोथ आदि-आदि, यही खबरें बीमार पड़ी अर्थव्यवस्था का बखान कर रही हैं. इस बीच, अर्थव्यवस्था को लेकर अब दो और बुरी खबरें सामने आई है. एक तो नवंबर माह में महंगाई (India Retail Inflation) 4.62 फीसदी से बढ़कर 5.54 फीसदी हो गई है. वहीं, दूसरी ओर अक्टूबर में इंडस्ट्रियल ग्रोथ (Index of Industrial Production) दोबारा से निगेटिव जोन में यथावत् है.

विशेषज्ञों का कहना है कि रिटेल महंगाई दर भी नवंबर में बढ़कर 5.54 फीसदी हो गई है, जो कि पिछले 3 साल में सबसे अधिक है. RBI के मध्यम समयावधि लक्ष्य (4%) से अधिक रही है. इस स्थिति में ब्याज दरों की कटौती को लेकर की जा रही आस को भी झटका लगा है.

वहीं बताया जा रहा है कि सितंबर की तुलना में थोड़ा सुधार हुआ है. यह -5.4 फीसदी के मुकाबले -3.8 फीसदी हो गई है. जबकि, पिछले साल अक्टूबर 2018 में यह 8.4 फीसदी थी.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है. इसके आधार पर देश की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक वृद्धि की गति का पता चलता है.

अर्थव्यवस्था से जुड़े विशेषज्ञों का स्पष्ट शब्दों में कहना है कि देश का मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज सेक्टर आर्थिक मंदी से जूझ रहा है. इसलिए दूसरे देश की कंपनियां यहां निवेश करने से बच रही है. यहां तक की कई क्षेत्रों की कंपनियों को अपनी कंपनी के गेट भी बंद करने पड़ रहे हैं.

इन आंकड़ों के आधार पर जानिए किस गति से बढ़ रही है महंगाई –

हाल ही में  केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालाय द्वारा ताजा आंकड़े जारी किए गए हैं, जिनके मुताबिक  खाने-पीने की महंगाई दर 10.1 फीसदी रही, जो अक्टूबर में 7.89 फीसदी थी, जो कि सालभर पहले -2.61 फीसदी थी. बल्कि इससे अधिक खुदरा महंगाई दर जुलाई 2016 में 6.07 फीसदी दर्ज हुई थी.

>> जून महीने में महंगाई दर 3.18 फीसदी रही.
>> जुलाई महीने में महंगाई दर 3.15 फीसदी रही.
>> अगस्त महीने में महंगाई दर 3.28 फीसदी हो गई.

>> सितंबर महीने में महंगाई दर बढ़कर 3.99 फीसदी हो गई.
>> अक्टूबर महीने में महंगाई बढ़कर 4.62 फीसदी पर पहुंच गई.
>> वहीं अब नवंबर महीने में यह आंकड़ा बढ़कर 5.54 फीसदी हो गया है.

IIP में हुआ थोड़ा सुधार-

औद्योगिक उत्पादन दर (IIP) -4.3 फीसदी के मुकाबले अक्टूबर में -3.8 फीसदी रही है, जो कि सरकार के लिए थोड़ी राहत के समान है.

वहीं गुरुवार को आंकडे जारी हुए हैं उनके अनुसार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का उत्पादन 2.1 फीसदी घट गया. जबकि अक्टूबर 2018 में इसमें 8.2 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज हुई थी.

यही नहीं बिजली उत्पादन में आई गिरावट ने भी सरकार को बढ़ा झटका दिया है. हालाँकि बिजली उत्पादन को विकास का प्रमुख मापदंड माना जाता है, लेकिन इसमें भी 12.2 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है. जबकि एक साल पहले इसमें 10.8 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज हुई थी.

इसकी मुख्य वजह की कम डिमांड रही. क्योंकि मंदी के दौर में इंडस्ट्री की मांग अपेक्षाकृत कम रही, इसलिए खनन की भी मांग कम रही. नतीजा, बिजली उत्पादन आठ फीसदी घट गया. वहीं अक्टूबर 2018 में खनन उत्पादन 7.3 फीसदी बढ़ा था.

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