गगनयन का सपना पूरा करने के लिए घने जंगल और बर्फीली सर्दी में जुटे चार भारतीय पायलट

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नई दिल्ली, पोलिसनामा ऑनलाइन – वायुसेना के चार जांबाज पायलट भारत के खास मानव मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए रूस में हाड़ कंपा देने वाले सर्दी और बर्फीली इलाके में ट्रेनिंग ले रहे है. मास्को के गागरिन रिसर्च एंड टेस्ट कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में रहे इस ट्रेनिंग के दौरान ये पायलेट समंदर के भीतर रहने और जंगलो में जोखिम लेने जैसे शारीरिक श्रम के साथ हाई स्किल्ड इंजिनिअरींग की भी पढाई कर रहे है. पांच साल की ट्रेनिंग को एक साल में पूरा करने का संकल्प लेकर चल रहे इन पायलटो को कई बार खुद को जोखिम में भी डालना पड़ा है.

रूस के टीवी चैनल रशिया टुडे के अनुसार दिन-रात अपने संकल्प को हासिल करने में जुटे ये भारतीय पायलट रुसी यान सोयूज में रुसी  भाषा में ट्रेनिंग ले रहे है. इसके लिए इन्हे रुसी भाषा भी सिखाई जा रही है. मास्को के जंगलो में ये खूंखार जानवरो से लड़ने का गुर सिख रहे है तो अंतरिक्ष से वापस आने के दौरान किसी गड़बड़ी की स्थिति में जिंदा कैसे रहना है इसके भी गुर सिख रहे है.

इन पायलटो को तीन और दो रातो के लिए जीवित रहने के लिए कड़ी ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग के बाद इन्हे हफ्ते भर की छुट्टी दी जाएगी। ट्रेनिंग सेंटर के प्रमुख पॉवेल व्लेसोव ने कहा कि मुझे पूरा यकीन है कि भारतीय वायुसेना के पायलट ये अंतरिक्षयात्री इन चुनोतियो का सामना करते हुए आगे बढ़ेंगे और सफलता हासिल करेंगे।

शाकाहारी खाना दिया जा रहा

 

पायलटो के लिए रुसी भाषा के साथ यहां का खाना भी बड़ी चुनौती बना हुआ है. ट्रेनिंग सेंटर में पायलटो की पसंद का खाना बनाया जा रहा है. उन्हें शाकाहारी खाना दिया जा रहा है।

दुनिया का चौथा देश होगा भारत 

गगणयन के लिए 2022 का लक्ष्य तय किया गया है. इसके लिए 10000 करोड़ की राशि  जमा की गई है. मिशन के तहत तीन मेंबर वाला क्रू सात दिन के लिए अंतरिक्ष की यात्रा पर जाएगा।  अंतरिक्ष पर मानव मिशन भेजने वाला भारत दुनिया का चौथा देश होगा।
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