पहले हुआ भरोसे का गैंगरेप व मर्डर, अब आया कोर्ट का बड़ा फैसला

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सांगली : पुलिसनामा ऑनलाईन – मोहब्बत में कोई सोच भी सकता है कि वह जिस इंसान से मोहब्बत कर रहा है वही उसकी आबरु अपने दोस्तों में बांट लेगा और फिर हमेशा के लिए गहरी नींद में सुला देगा।  जीवनभर साथ निभाने का वादा कर प्रेमिका के आने के बाद अपने दो दोस्तों के साथ गैंगरेप करने वाले दरिंदे सहित तीनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सांगली जिला सत्र न्यायालय की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उज्ज्वला नंदेश्वर ने यह फैसला सुनाया तथा मृत युवती अनुमिति चव्हाण के परिवार को 75 हजार रुपये देने का आदेश दिया। बता दें कि विटा के गार्डी में वर्ष 2012 में 19 साल की अनुमिति से सामूहिक बलात्कार किया गया था।

कोपर्डी की तर्ज पर पूरे महाराष्ट्र को हिला देने वाले इस मामले में आखिर सात साल बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला। पुलिस ने बताया कि युवती के धोखेबाज प्रेमी लक्ष्या उर्फ लक्या उर्फ लक्ष्मण संदीपान सरगर (उम्र 20 वर्ष), अनुज अर्जुन पवार (उम्र 21 वर्ष) व दादासो भास्कर आठवले (उम्र 30 वर्ष, तीनों निवासी गार्डी, तहसील खानापुर) सजायाफ्ता दोषियों के नाम हैं।

निर्जल कुएं में पाया गया था शव
विटा के पास गार्डी में अक्टूबर 2012 में 19 वर्षीय युवती से गैंगरेप कर उसकी बेरहमी से हत्या किये जाने का मामला उजागर हुआ था। अनुमति को लक्ष्मण ने प्यार के जाल में फांस लिया था। उसकी चिकनी-चुपड़ी बातों में आकर वह उस पर भरोसा कर बैठी और 12 अक्टूबर को घर छोड़कर उसके साथ निकल गई। 16 अक्टूबर को विटा के एक निर्जल कुएं में उसका शव मिला था। पुलिस को तफ्तीश में पता चला था कि मृतक लड़की का नाम अनुमिति है और उसी के गांव में रहने वाले लक्ष्या के साथ प्यार का चक्कर चल रहा था।

संदीप शिंदे नामक एक गवाह ने पुलिस को बताया कि उसने लक्या सरकर, अनुज पवार, दादासो आठवले व उनका एक अन्य साथी सागर हत्तीकर को पवई टेक परिसर में देखा था। पुलिस ने लक्ष्या उर्फ लक्ष्मण को हिरासत में लेकर पूछताछ की, लेकिन वह गोलमोल जवाब देने लगा। इसके बाद पुलिस ने अपनी स्टाइल में पूछताछ की, जिसमें उसने बताया कि उसके दोस्त अनुज व दादासो ने भी अनुमिति के साथ मौजमस्ती की इच्छा जताई। इसके पश्चात लक्ष्मण ने युवती को अपने दोस्तों को खुश करने को कहा। इससे वह भड़क गई और उसने लक्ष्मण को भला-बुरा कहा। उस समय तीनों कामांधियों पर हवस का नशा सवार था। उन्होंने युवती को पकड़कर उसके साथ मुंह काला किया। बाद में गला दबाकर उसे मौत के घाट उतारा और सबूत मिटाने के लिए निर्जल कुएं में फेंक दिया।

मृतका के परिवार को 75,000 रुपये देने का आदेश
लक्ष्मण से पूरी जानकारी लेने के बाद पुलिस ने अनुज व दादासो को दबोच लिया। विटा पुलिस ने तीनों के खिलाफ सबूत जुटाए। मामले की अंतिम सुनवाई 16 जुलाई 2019 को सांगली जिला सत्र न्यायालय में हुई। इसमें सरकारी पक्ष की ओर से वकील उल्हास चिप्रे ने 20 गवाहों के बयान पेश किये और घटना को कोपर्डी मामले की तरह गंभीर बताकर आरोपियों को फांसी देने की मांग की। अदालत ने तीनों को दोषी करार देते हुए आजीवन यानी मरने तक जेल में रखने तथा सबूत मिटाने के लिए 7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही हर आरोपी को मृत युवती के परिवार को 25-25 हजार (कुल 75,000) रुपये देने का आदेश दिया।

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