चांद पर उतरने से ठीक पहले लैंडर विक्रम से संपर्क टूटा : इसरो

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बेंगलुरू, पुलिसनामा ऑनलाइन – चंद्रयान-2 के आखिरी चरण में भारत के मून लैंडर विक्रम से उस समय संपर्क टूट गया, जब वह शनिवार तड़के चंद्रमा की सतह की ओर बढ़ रहा था।

इससे 978 करोड़ रुपये की लागत वाले चंद्रयान-2 मिशन पर संस्पेंस बढ़ गया है। इससे जहां इसरो के वैज्ञानिकों में निराशा देखने को मिली, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाया और कहा कि आपने बहुत अच्छा काम किया है। उन्होंने कहा कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और यह यात्रा जारी रहेगी।

इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि संपर्क उस समय टूटा, जब विक्रम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाले स्थान से 2.1 किलोमीटर दूर रह गया था। उन्होंने कहा कि चंद्रमा की सतह से 2.1 किलोमीटर पहले तक लैंडर प्लान के हिसाब से काम कर रहा था। उसके बाद उससे संपर्क टूट गया।

स्क्रीन पर यह देखा गया कि आखिरी चरण में विक्रम निर्धारित पथ से थोड़ा भटक गया और इसके बाद इसका आर्बिटर से संपर्क टूट गया। इसरो अधिकारियों ने कहा कि डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है।

इस बीच 2379 किलोग्राम वजनी चंद्रयान-2 आर्बिटर चांद का चक्कर लगाता रहेगा। इसका जीवनकाल एक साल का है।

इसरो अधिकारियों में जहां उदासी का आलम है, वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सांत्वना देते हुए कहा, “जब मिशन बड़ा होता है तो निराशा से पार पाने का हिम्मत होना चाहिए। मेरी तरफ से आप सभी को बहुत बधाई है। आपने देश की और मानव जाति की बड़ी सेवा की है।”

इससे पहले रात एक बजकर 52 मिनट 54 सेकेंड पर चांद की सतह पर चंद्रयान-2 को लैंड करना था। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसरो सेंटर पहुंचे थे।

उल्लेखनीय है कि 22 जुलाई को चंद्रयान-2 लांच किया गया था।

चंद्रयान में तीन प्रमुख हिस्से हैं- ऑर्बिटर (वजन 2,379 किलोग्राम, आठ पे लोड्स), लैंडर विक्रम (1,471 किलोग्राम, चार पे लोड्स) और एक रॉवर प्रज्ञान (27 किलोग्राम, दो पे लोड्स)।

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