‘हाफ कोरोना’ कह रहे हैं लोग भारत की इस बैडमिंटन स्टार को, चीन का माल कहने से भी नहीं हिचक रहे 

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  नई दिल्ली. पोलिसनामा ऑनलाइन- महिला डबल्स में भारत की दिग्गज  सोशल मीडिया को लेकर बेहद परेशान हैं। अभद्र टिप्पणियों में लोग उन्हें चीन का माल, हाफ चीनी और चिंकी जैसी नस्लीय टिप्पणियां कर रहे हैं। अब उनके साथ हाफ कोरोना शब्द भी जुड़ गया है। बकौल ज्वाला गुट्टा – लोग मुझे ट्रोल करते हैं और व्यक्तिगत रूप से मिलने पर मेरे साथ सेल्फी खिंचवाने की मांग करते हैं।

नहीं सोचते दिल पर क्या गुजरता होगा :  चीनी मां की बेटी के रूप में बड़ा होना आसान नहीं है। एक भारतीय के तौर पर किसी को कोरोना और चाइनीज वायरस कहते हुए हम ये भूल जाते हैं कि हमारे यहां मलेरिया के भी बड़ी संख्या में मामले हुए थे और ट्यूबरक्लोसिस से हर साल दो लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा देते हैं। जरा सोचिए कि अगर विदेश में कोई भारतीय सड़क पर घूम रहा हो और वहां के लोग उसे मलेरिया या टीबी कहकर बुलाएं तो कैसा महसूस होगा।

मैंने समझ लिया, यह आसान नहीं : ज्वाला गुट्टा ने बताया कि मेरी मां ने कभी नए कल्चर में ढलने में आई परेशानियों को लेकर शिकायत नहीं की। जब मैं बड़ी हो रही थी तो थोड़ी अलग दिखती थी और लंबी थी।  मैंने कभी इस बात को नहीं समझा कि इसमें नस्लीय बिंदु भी शामिल है। मैं उन बच्चों को यही बात समझाने की कोशिश करती थी कि मेरा चेहरा थोड़ा बड़ा है, इसलिए मेरी आंखें छोटी लगती है। मगर जब मैंने बीसवें साल में प्रवेश किया, तब समझ आया कि इनमें से कुछ भी स्वीकार्य नहीं है। नॉर्थईस्ट के लोगों को भी इसे लेकर हिंसा का सामना करना पड़ता है।

मां ने कभी शिकायत नहीं की : मेरे परदादा भारत आए थे और उन्होंने रबींद्रनाथ टैगोर के साथ पढ़ाई की थी। यहां तक कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने उन्हें शांतिदूत नाम दिया था। वह सिंगापुर-चाइनीज न्यूजपेपर में चीफ एडीटर थे और महात्मा गांधी की आटोबायोग्राफी का अनुवाद करना चाहते थे। तभी मेरी मां उनकी मदद के लिए भारत आईं। मेरी मां फार्मास्यूटिकल कंपनियों की सलाहकार हैं और सुबह 8 बजे से शाम के 6 बजे तक काम करतीं हैं। उन्हें ऐसे दक्षिण भारतीय परिवार में एडजस्ट करना पड़ा, जिसने उनके लुक को लेकर कभी उन्हें पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। मगर मेरे माता-पिता एक-दूसरे के लिए हमेशा खड़े रहे और मुझे उन पर गर्व है।

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