सिक्योरिटी एजेंसियों के लाइसेंस रिन्यूवल पर पुलिस कमिश्नर ने लगाई ब्रेक

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पिंपरी : पोलीसनामा ऑनलाइन – पिंपरी सोसायटी में काम करने वाले वॉचमैन अपना काम ईमानदारी और लगन से करे इस पर अब पुलिस द्वारा खास नजर रखी जा रही है। सोसायटियों के सिक्योरिटी गार्ड्स सप्लाई करने वाली एजेंसियों के लिए जरूरी लाइसेंस को हर पांच वर्ष में रिन्यूवल किया जाता है। इसके लिए पुलिस कमिश्नर का सिग्नेचर जरूरी होता है। लेकिन इस रिन्युअल पर पुलिस कमिश्नर खुद ब्रेक लगाएंगे। हर लाइसेंस के रिन्यूवल की रिपोर्ट की जांच कर परमिशन दिया जाएगा। नियमानुसार सभी औरपचारिकताएं पूरी नहीं होने पर लाइसेंस रिन्यूवल नहीं होगा। यह जानकारी पुलिस कमिश्नर आर।के। पद्मनाभन ने दी।

शहर में 20 से 25 हजार आवासीय सोसायटी है। इसकी सुरक्षा प्राइवेट सिक्योरिटी गार्ड्स के हाथों में होती है। लेकिन ये सिक्योरिटी गार्ड्स नियमों के तहत नियुक्त नहीं होने की वजह से सोसायटियों में चोरियां, हत्याएं या सोसायटियों के सामने से छोटे बच्चों के अपहरण जैसी घटनाएं घट रही है। हाल ही में वाकड़ पुलिस स्टेशन की तरफ से सुबह के वक्त परिसर की सोसायटी का सर्वे किया गया था। इनमें 60 फीसदी सिक्योरिटी गार्ड्स सोए हुए मिले थे।

ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया है कि सोसायटी तो सतर्क हो गई लेकिन एंजेसियों का क्या? दरअसल एंजेसियों की तरफ से नियमों का पालन नहीं किया जाता है। केवल कागजों पर नियमों का पालन किया जाता है। इसलिए पुलिस कमिश्नर ने इस मामले को अलग तरह से लिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक एजेंसियों की तरफ से नियमों का पालन नहीं होता है तब तक लाइसेंस का रिन्यूवल नहीं किया जाएगा। रिन्यूवल के लिए पुलिस कमिश्नर को आवेदन देने की शुरुआत हो गई है। चुनाव के बाद इस दिशा में पुलिस कमिश्नर कार्रवाई शुरुआत करेंगे।

क्या है स्थिति
फिलहाल सिक्योरिटी गार्ड्स सुरक्षा के कार्यों के अलावा सोसायटी के चेयरमैन या अन्य की गाड़ियों को साफ करने, गाड़ियां आने पर गेट खोलने का काम भी करते हैं। सिक्योरिटी गार्ड्स की सैलरी पर्याप्त नहीं होने की वजह से एक सिक्योरिटी गार्ड्स दिन व रात में अलग-अलग जगह ड्यूटी करते हैं। पुलिस के सर्वे में यह बात सामने आई है कि सुबह में सुरक्षा व्यवस्था के वक्त वह गहरी नींद में सोए रहते हैं। इसके अलावा कई जगहों से सिक्योरिटी गार्ड्स द्वारा अपराध करने की घटनाएं सामने आई है।

नियम क्या कहता है ?
लाइसेंस के रिन्यूवल या लाइसेंस के लिए संबंधित कंपनियों को अपने पास मौजूद सभी सिक्योरिटी गार्ड्स की जानकारियां पुलिस को देनी जरूरी है। इनमें हर सिक्योरिटी गार्ड्स के बारे में सही जानकारी होनी चाहिए। हर सिक्योरिटी गार्ड्स का फिटनेस सर्टिफिकेट होना जरूरी है। इसके अलावा हर एंजेंसी द्वार सप्ताह में एक बार सभी सिक्योरिटी गार्ड्स की फिटनेस के लिए परेड कराए। इसके लिए एक रिटायर्ड सैनिक की नियुक्ति की जाए। वर्ष में एक बार आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए मॉकड्रिल हो। लेकिन इन सारे नियमों का पालन केवल कागजों में होता है। इस पर रोक लगाने के लिए चुनाव के बाद पुलिस कमिश्नर खुद सारी रिपोर्ट की जांच करेंगे।

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