भारत के ‘वो’ राज्य जहां भारतीयों को भी जाने के लिए लगता है ‘वीजा’

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नई दिल्ली :  पुलिसनामा ऑनलाइन – अपने ही देश के किसी राज्य में जाने के लिए वीजा लगने की बात अजीब लगता है। हालांकि ये सच है। भारत में ऐसे राज्य है जहां भारतीय को भी जाने के लिए वीजा (इनर लाइन परमिट) लेना पड़ता है। जम्मू-कश्मीर में भी पहले इनर लाइन परमिट लागू थी, लेकिन श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा आंदोलन करने के जम्मू-कश्मीर में परमिट सिस्टम को खत्म कर दिया गया। लेकिन नागालैंड में यह नियम अबतक लागू है। हम जिस राज्य की बात कर रहे हैं, वह नागालैंड है, जहां बिना अनुमति के जाना मना है।

बिना वीजा के यहां जाने से यहां के स्थानीय लोग उसे रोक-टोक करते है। हालांकि इस नियम पर आज भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी बहस का विषय बना हुआ है। बता दें कि भाजपा के नेता अश्निनी उपाध्याय हाल ही में इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। इसके अलावा लोकसभा में बीते दिनों दो सांसदों ने भी इनर-लाइन परमिट सिस्टम का मुद्दा उठाया था। इस मुद्दे को लेकर सरकार ने कहा, ‘भारतीय नागरिकों को मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और दीमापुर को छोड़कर नगालैंड में प्रवेश करने के लिए इनर लाइन परमिट की जरूरत होती है। फिलहाल दीमापुर के लिए इनर लाइन परमिट लागू करने को लेकर राज्य सरकार के प्रस्ताव पर अभी विचार-विमर्श किया जा रहा है।”

इनर लाइन परमिट?
भारत में फिलहाल सिर्फ नागालेंड में ही इनर लाइन परमिट सिस्टम लागू है। बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेग्यूलेशन्स, 1873 के तहत एक सीमित अवधि के लिए किसी संरक्षित, प्रतिबंधित क्षेत्र में दाखिल होने के लिए अनुमति देता है। साथ ही किसी भी पर्यटन के लिए जाने के लिए भी अनुमति लेनी जरूरी होती है।

इनर लाइन परमिट की जरुरत क्यों –
इस क्षेत्र के बारे में बताया जाता है कि यहां आजादी से पहले ब्रिटिश सरकार ने इनर लाइन परमिट सिस्टम लागू किया था। ऐसा उन्होंने इसलिए किया था क्योंकि नागालैंड क्षेत्र में प्राकृतिक औषधी और जड़ी-बूटियों का प्रचुर भंडार था। जिसे ब्रिटिश सरकार ब्रिटिश भेजा करती थी। इन औषधियों पर किसी दूसरों की नजर न पड़े, इसके उन्होंने नागालैंड में इनर लाइन परमिट की शुरुआत की थी। साथ ही कला और संस्कृति का भी कारण दिया जाता है।

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