RTI फाइल करके सुप्रीम कोर्ट से ली जा सकती है ये जानकारियां

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नई दिल्ली, पोलिसनामा ऑनलाईन – सुप्रीम कोर्ट ने अब खुद भी तय कर दिया है कि वो खुद भी सुचना के अधिकार की हद में है. सुचना के अधिकार के तहत आम जनता कोर्ट से भी जानकारी मांग सकती है. लेकिन इसकी सीमा तय की गई है. कोर्ट की स्वतंत्रता और निजता से जुड़े सवाल का जबाव नहीं दिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को रखा बरक़रार 
आरटीआई एक्टिविस्ट सुभाष चंद्र अग्रवाल ने कहा कि कुछ मुद्दों पर अस्पष्टता और ग्रे एरिया है जिसका फायदा उठाकर अधिकारी जनकरनी देने से मना कर सकते है. बता दे कि सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने अपने फैसले में दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को बरक़रार रखा है, जिसमे सुप्रीम कोर्ट के जजों को भी सुचना का अधिकार के तहत लाये जाने का आदेश दिया गया था.
फैसले के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के जजों के साथ चीफ जस्टिस का दफ्तर यानी सचिवालय भी आरटीआई के दायरे में होगा।
क्या होगा फायदा 
* आम नागरिक सुप्रीम कोर्ट के जजों की चल अचल सम्पति से जुडी जानकारी हासिल कर सकते है
* हाई कोर्ट के जजों के चयन, नियुक्ति की प्रक्रिया के तहत्य कोलेजियम के फैसलों  हासिल की जा सकती है.
* जजों के सीनियर क्रम की जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है.
* चीफ जस्टिस बनने और कार्यकाल की जानकारी मिल सकती है.
आरटीआई के मामले में क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला 
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि प्रधान न्यायधीश का कार्यालय सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे में आता है. प्रधान न्यायाधीश राजन गोगोई, जज संजीव खन्ना और दीपक गुप्ता ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश का कार्यालय आरटीआई के तहत एक सार्वजानिक प्राधिकरण है. इसके साथ ही कोर्ट ने उस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के इस संबंध में 2010 के फैसले को बरक़रार रखा है.
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