देश के ‘इस’ राज्य में जाने का लगता है ‘वीजा’

-    चारों तरफ पहाड़ियों से घिरे नागालैंड में है जड़ी-बूटियों का भंडार, जो इसकी सीमाओं को चाक चौबंद करने का एक कारण बना

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–    यहाँ के आदिवासियों के संरक्षण हेतु, दूसरों के लिए नहीं खोली गई सीमाएं

पुलिसनामा ऑनलाईन – हमारे देश में एक ऐसा भी राज्य है, जहाँ पर अगर आप जाना चाहें तो पहले अनुमति लेनी पड़ेगी. बगैर इसके यहाँ पर किसी बाहरी राज्य के नागरिक को आने की अनुमति नहीं है. फिर चाहे भारत के किसे भी हिस्से का ही क्यों न हो. तो हम बता दे कि हम नागालैंड की बात कर रहे हैं. यह अपनी प्राक्रतिक खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है. चारों तरफ हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा नागालैंड ही एक ऐसा राज्य है, जहाँ पर हमे जाने के लिए ‘वीजा’ की जरूर होती है. बगैर वीजा के आ इसकी सीमा में कदम तक नही रख सकते हैं. आपको यह जानकर जरुर हैरानी हो रही होगी, लेकिन यह बिलकुल सही है. यहाँ जाने के लिए पहले ‘इनर लाइन परमिट’ लेना पड़ता है. यह एक तरह का आंतरिक वीजा है.

बता दें कि नागालैंड राज्‍य का क्षेत्रफल 16,579 वर्ग किलोमीटर तथा 2001 के जनगणना के अनुसार इसकी आबादी 19,88,636 हैगौरतलब है कि पहले इसका नाम नगा हिल्‍स तुएनसांग क्षेत्र था, लेकिन साल 1961 में अंग्रेजों ने यह नाम बदलकर नागालैंड’  कर दिया था.

अंग्रेजों की लालच ने इसकी सीमाओं पर खींच दी थी लाइनें

हालांकि आजादी से पहले यहाँ आने-जाने को लेकर किसी तरह की पाबंदी नहीं थी. लेकिन अंग्रेजों की लालच ने इसकी सीमाओं पर लाइनें खिंच दी. जी हां,यह राज्य खनिज संपदाओं और जड़ी-बूटियों से भरपूर है. अंग्रेजों ने इस बात का फयदा उठाया और यहाँ की जड़ी-बूटियों आदि को ब्रिटेन भेजा जाने लगा. इस अनमोल जड़ी-बूटियों पर किसी की नजर ना पड़े,  इसके लिए ब्रिटिशर्स ने नागालैंड के हिस्से में इनर लाइन परमिट की शुरुआत कर दी. इसके बाद बहरी लोगों को यहाँ आने की मनाही हों गई.

 ‘इनर लाइन परमिट’ को खत्म करने की उठी मांगे

हाल ही में बीजेपी नेता अश्निनी उपाध्याय इस मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर पहुंचे तो वहीं बीते 23 जुलाई को दो सांसदों ने भी लोकसभा में इनर लाइन परमिट सिस्टम खत्म करने का मुद्दा उठाया था, जिस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हो पाया है.

आजादी के बाद भी यहाँ के आदिवासियों संरक्षण के लिए बरकरार रखा गया नियम

आजादी के बाद भी सरकार ने इनर लाइन परमिट को जारी रखा. इसके पीछे तर्क था कि नागा आदिवासियों का रहन-सहन, कला संस्कृति, बोलचाल औरों से अलग है. ऐसे में इनके संरक्षण के लिए इनर लाइन परमिट जरूरी है. ताकि बाहरी लोग यहां रहकर उनकी संस्कृति प्रभावित न कर सकें.

 उल्लेखनीय है कि पहले जम्मू-कश्मीर में भी यही वीजा नियम लागू था, मगर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आंदोलन के बाद वहां परमिट सिस्टम खत्म हो गया. लेकिन, नागालैंड में यह नियम आज भी जारी है.

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