चीन के दादागिरी को अब तक का बड़ा जवाब, अंडमान में मिलिट्री बेस मजबूत करने की तैयारी तेज

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नई दिल्ली ऑनलाइन टीम – लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत-चीन तनाव के बीच चीनी एप बैन के बाद अब हिंद महासागर में भी इंडियन आर्मी खुद को मजबूती दे रही है। माना जा रहा है कि गलवान तनाव लंबे समय तक कम नहीं हो सकेगा। ऐसे में अगर युद्ध टालना हो तो भी भारत को जलमार्ग पर भी खुद को मजबूत करना होगा, ताकि चीन पर दबाव बढ़े। अब अगर भारत लद्दाख में चीन की दादागिरी का जवाब देने के लिए अंडमान के रास्ते हिंद महासागर में थोड़ी सी भी रुकावट डाल दे तो चीन परेशान हो जाएगा। इससे उसकी इंडस्ट्री पर काफी बुरा असर होगा।

19 साल से अनदेखी : अंडमान निकोबार में सैन्य बेस तैयार करना फिलहाल देश की प्राथमिकता में है। समुद्री मार्ग पर खुद को मजबूत करने के लिए अब Andaman Nicobar Command (ANC) को मजबूत बनाने की बात हो रही है। इसके लिए लगभग साढ़े 5 करोड़ रुपए का इंफ्रा डेवलपमेंट प्रोग्राम भी शुरू हो चुका है। बता दें कि ये कमांड साल 2001 में तैयार हुई थी। यह देश की इकलौती कमांड है, जिसमें थल, वायु और नौसेना तीनों का ऑपरेशन कमांडर एक ही है। इस कमांड की 19 सालों से अनदेखी होती रही, लेकिन अब चीन को समुद्र का सुपर पावर बनने से रोकने के लिए भारत सरकार इसे पुर्नगठित करने जा रही है। भारत अंडमान में इस कमांड को मजबूत कर ले तो चीन के व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता कठिन हो सकता है। साथ ही यहां से चीन की समुद्र में चल रही गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी। अगर कभी युद्ध के हालात बन गए तो चीन को भारत यहीं पर रोक सकेगा।

कैसे बन सकता है दबाव : फिलहाल चीनी व्यापार का काफी बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से होता है। दरअसल दो दशक पहले चीन ने पक्का किया कि उसे जलमार्ग के जरिए अपनी व्यापारिक और सामरिक ताकत बढ़ानी है। जल्दी ही उसने ऐसा कर भी लिया। फिलहाल साउथ चाइना सी के जरिए चीन अपना काफी बड़ा व्यापार करता है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुद्री जलमार्ग (SLOC) के जरिए भी चीन काम काफी काम चलता है। इसी के तहत हर साल चीन के ऑइल टैंकर, जहाज आदि हिंद महासागर से होकर भी निकलते हैं।

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