कभी कच्ची उम्र में ब्याह दी जाती थी, आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कर रही हैं गांव का नाम रोशन

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  • फुटबॉल खेल झारखंड के छोटे से गाँव से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंची लडकियां
  • कोच की कोशिशों ने बदली सैंकड़ों लडकियों की किस्मत

पुलिसनामा ऑनलाईन – आज हम नारी शक्ति व नारी सम्मान की बात करते हैं, लेकिन जब असल में उनके लिए कुछ करने की बात आती है तो सबसे पहले घर वाले ही दिवार बन कर खड़े हो जाते हैं. ऐसा ही एक झारखंड का गाँव हैं, जहाँ की लडकियों में कुछ कर दिखने का हुनर था लेकिन छोटी सी उम्र में ब्याही जा रही थी. ऐसे में वहां के एक टीचर इनके हक के लिए आगे आए और आज ये लडकियाँ फुटबाल में अपना नाम रोशन कर रहीं हैं. इतना ही नहीं उक्त टीचर की कोशिशों से गाँव में बाल-विवाह बिलकुल बंद हो गया है. आज इस गांव में 650 लड़कियां फुटबॉल की ट्रेनिंग ले रही हैं.

बोझ समझ कर कच्ची उम्र में ब्याह दी जाती थी

बता दें झारखंड के बरतोली गांव जहाँ बेटियों को बोझ समझ कर उनकी कच्ची उम्र में ही शादी कर दी जाती हैं. या तो उनसे नशीला पदार्थ बेचने के लिए मजबूर किया जाता था. इतने से भी पूर्ति ना हो तो 10-12 साल में ही पैसों की खातिर बच्चियों की शादी कर दी जाती थी.

कोच आनंद गोपाल की पहल ने बदली बेटियों किस्मत

इस शोषण से लडकियों को बचाने की खातिर कोच आनंद गोपाल ने आवाज उठाई व लडकियों के परिवार वालों को समझा कर लडकियों को फुटबॉल की ट्रेनिंग देने के लिए राजी किया. आज ये लडकियां देश-विदेश में अपना नाम रोशन कर रही हैं.

बाल-विवाह की कुप्रथा भी बंद

कोच आनंद गोपाल द्वारा गांव के लोगों को बाल विवाह का नुकसान समझाया गया. फलस्वरूप साल 2013 के बाद गांव की तस्वीर ही बदल गई है. अब आसपास की 8 पंचायत के 20आदिवासी गांव में बाल विवाह बंद हों गया है.

शीतल टोप्पो को फीफा में बुलाया

ग्रेजुएशन कर रही शीतल टोप्पो झारखंड की तेजी से उभरती हुई फुटबॉलर हैं. उन्हें फीफा द्वारा रूस में आयोजित फुटबॉल वर्ल्ड कप में मैच देखने के लिए बतौर मेहमान बुलाया गया था. अंडर-17 नेशनल फुटबॉल कप 2016 का खिताब झारखंड के नाम करने वाले टूर्नामेंट में उसने कुल 13 गोल किए थे. शीतल मैन ऑफ द टूर्नामेंट भी बनीं.

अब और 6 लडकियां डेनमार्क में फुटबॉल को करेगी ‘किक’

वहीं यहाँ की दूसरी उभरती खिलाड़ी प्रियंका कच्छप अक्टूबर 2018 में लंदन में अपने खेल का जादू  दिखा चुकी है. शीतल और प्रियंका के बाद अब गांव की 6 और लड़कियां फुटबॉल खेलने के लिए डेनमार्क जा रही हैं, जिनके नाम अंशु कच्छप, अनिता, लक्ष्मी, चिंटु कुमारी, सोनी मुंडा और संध्या टोप्पो है. ये सभी 21 जुलाई को रांची से डेनमार्क के लिए रवाना होंगी.

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