पाकिस्तान : हजारा समुदाय को निशाना बनाकर विस्फोट, 16 मरे

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इस्लामाबाद : पोलीसनामा ऑनलाईन – पाकिस्तान के क्वेटा शहर में शुक्रवार को हजारा समुदाय के लोगों को निशाना बनाकर किए गए विस्फोट में कम से कम 16 लोग मारे गए और दो दर्जन से अधिक घायल हो गए। पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) अब्दुल रज्जाक चीमा ने मृतकों की संख्या की पुष्टि की और डॉन न्यूज को बताया कि मरने वालों में से आठ लोग हजारा समुदाय के हैं जिन्हें सांप्रदायिक हिंसा का निशाना बनाया जाता रहा है क्योंकि वे अपनी विशिष्ट शारीरिक बनावट के कारण आसानी से पहचाने जा सकते हैं।

डीआईजी चीमा ने कहा, “हमला एक दुकान (हजारगंजी इलाके की सब्जी की दुकान) में हुआ। आलू से भरी एक बोरी में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईडी) लगा था। हमें अभी पता करना है कि इसका टाइम सेट किया गया था या रिमोट नियंत्रित था। जांच जारी है। ”

मरने वालों में फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) का एक सैनिक भी शामिल है। इस हमले की अभी तक किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली है। पिछले चार दशकों के दौरान हिंसा से बचने के लिए अफगानिस्तान से भागकर आए करीब पांच लाख हजारा समुदाय के लोग क्वेटा में बस गए हैं। शहर का हजारगंजी इलाका अतीत में इसी तरह के हमलों का गवाह रहा है।

हजारा समुदाय के दुकानदार हजारगंजी बाजार में अपनी दुकानों पर सब्जियां और फल बेचने के लिए जाने जाते हैं। उन्हें हजारीगंज से आने और जाने के दौरान सुरक्षा मुहैया कराई जाती है क्योंकि यह लगातार हमले के निशाने पर रहते हैं। चीमा ने डॉन को बताया, “हजारा समुदाय के लोग रोजाना हजारा क्षेत्र से एक काफिले में सब्जियां खरीदने आते हैं। उन्हें पुलिस और एफसी द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाती है और फिर वे लौट जाते हैं। आज भी ऐसा ही था।”

बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री जाम कमाल ने हमले की कड़ी निंदा की है और आश्वासन दिया है कि हमले में शामिल तत्वों से सख्ती से निपटा जाएगा। कमाल ने कहा, “जिन लोगों की चरमपंथी मानसिकता है, वे समाज के लिए एक खतरा हैं।’ उन्होंने कहा, “हमें शांति को बाधित करने की साजिश को जरूर नाकाम करना चाहिए।” प्रधानमंत्री इमरान खान ने विस्फोट की निंदा की है और हमले की जांच रिपोर्ट मांगी है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनसीएचआर) द्वारा पिछले साल जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि जनवरी 2012 से दिसंबर 2017 तक बलूचिस्तान प्रांत के सबसे बड़े शहर क्वेटा में आतंकवाद की विभिन्न घटनाओं में हजारा समुदाय के 509 सदस्य मारे गए और 627 घायल हुए।

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