बांग्लादेश के साथ चीन की नजदीकियां भारत के लिए तगड़ा झटका, पढ़े पूरा समीकरण

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नई दिल्ली : ऑनलाइन टीम – एशिया में चीन हमेशा से अपने आपको सबसे ऊपर और शक्तिशाली समझा है। चीन के विस्तारवाद निति से विश्व के कई देश परेशान है। श्रीलंका, मालद्वीव, पाकिस्तान के बाद अब चीन ने धीरे-धीरे नेपाल और अब बांग्लादेश पर अपनी फायदेमंद वाली कूटनीति शुरू कर दी है। दरअसल चीन कभी नहीं चाहेगा की भारत उसके मुकाबले आगे बढ़े। इसलिए चीन अब भारत के सभी पड़ोसी दशों से अपने रिश्ते बनाने जुट गए है। साथ ही उन देशों पर आर्थिक लालच देकर वह अपने पाले में करना चाहते है।

दरअसल बांग्लादेश हमेशा से भारत का भरोसेमंद दोस्त रहा है लेकिन, अब वहां भी चीन की आहट सुनाई देने लगी है। बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन बांग्लादेश को नदी परियोजनाओं के लिए 1 अरब डॉलर का कर्ज देने जा रहा है। भारत के लिए ये चिंता की बात इसलिए भी है क्योंकि तमाम कोशिशों के बावजूद भारत-बांग्लादेश के बीच नदी जल बंटवारे को लेकर समझौता नहीं हो सका है। रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्रालय के अधीन तीस्ता नदी के प्रबंधन के लिए एक बहुत बड़ी परियोजना को शुरू किया जा रहा है जिसकी फंडिंग को लेकर चीन ने सहमति दे दी है। उम्मीद है कि हम दिसंबर महीने से इस परियोजना की शुरुआत कर सकते हैं।

बांग्लादेश ने चीन से मांगी थी मदद –
मई महीने में बांग्लादेश के वित्त मंत्रालय ने रंगपुर इलाके में तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना के लिए चीन से 883.27 मिलियन का कर्ज मांगा था। ये पहली बार है जब चीन बांग्लादेश की नदी प्रबंधन से जुड़ी किसी परियोजना में शामिल होगा और फंडिंग के लिए कर्ज देगा। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षात्मक कदम ना उठाने की वजह से हर साल बाढ़ से संपत्तियों-घरों को नुकसान पहुंच रहा है। बाढ़ आने से मृदा अपरदन की गंभीर समस्या भी सामने आ रही है।

लटका हुआ था प्रोजेक्ट –
भारत के साथ तीस्ता नदी जल बंटवारा समझौते को लेकर बांग्लादेश किसी नतीजे पर पहुंचने का इंतजार कर रहा है। बांग्लादेश कई बार अपनी समस्याओं के लिए भारत को जिम्मेदार ठहरा चुका है। बांग्लादेश भारत से ढलान पर है इसलिए जल आपूर्ति के लिए वो भारत पर निर्भर है। हालांकि, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कड़े विरोध की वजह से ये समझौता पिछले 8 सालों से लटका हुआ है।

कहा गया है कि भारत की तरफ बनाए गए बांध की वजह से सर्दियों में पानी का बहाव धीमा पड़ जाता है जिससे बांग्लादेश में करीब दो महीने तक जल संकट जैसी स्थिति हो जाती है। अगर हम इस परियोजना को लागू कर पाते हैं तो सर्दियों में बांग्लादेश के एक बड़े हिस्से में जल आपूर्ति सुनिश्चित हो जाएगी। तीस्ता नदी भारत के सो लामो से निकलती है और सिक्किम, पश्चिम बंगाल से गुजरती है। बांग्लादेश के चिल्मड़ी में ब्रह्मपुत्र नदी में मिलने से पहले ये यहां के रंगपुर डिवीजन में प्रवेश करती है। तीस्ता उन 54 नदियों में से एक है जो भारत से बहते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है।

बांग्लादेश चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड में भी शामिल हो चुका है जबकि भारत इसका विरोध करता रहा है। यहां तक कि भारत और चीन के बीच जब लद्दाख में हिंसक झड़प हुई तो बांग्लादेश की तरफ से कोई बयान जारी नहीं किया गया। एक तरफ, चीन-बांग्लादेश नजदीक आ रहे हैं तो दूसरी तरफ बांग्लादेश और पाकिस्तान के रिश्तों में जमी बर्फ पिघल रही है।

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